लखनऊ

भारत

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी है। यह अवध के नवाबों की गद्दी के रूप में बढ़ा।

लखनऊ, भारत
फ़ोटो: Harsh13596 (CC BY-SA 4.0)

यह भाषा यहाँ कैसे इस्तेमाल होती है

हिन्दी और उर्दू दोनों रोज़मर्रा का हिस्सा हैं। उर्दू का यहाँ लंबा साहित्यिक इतिहास है, इसलिए कोई एक भाषा अकेली नहीं रहती।

इस शहर में

भाषा
हिन्दी
और भी सुनाई देती है
ज़्यादातर हिन्दी
एक स्थानीय शब्द
आदाब — एक आदरपूर्ण नमस्ते।
लिखावट
देवनागरी और उर्दू लिपि

लोग क्या कहते हैं

इस शहर की आम पंक्तियाँ: सवारी, काउंटर, खाना, और नमस्ते।

आना-जाना

ई-रिक्शा

चौक चलिए।

चौक तक, कृपया।

दरवाज़ा बंद होते या अगला स्टॉप पुकारे जाते समय आप यह सुनते हैं। यह लिखा भी होता है, इसलिए एक शब्द छूट जाए तो सफर यहीं खत्म नहीं हो जाता।

खाना

दुकान

एक कबाब।

एक कबाब।

ऑर्डर ऐसे छोटे टुकड़ों से बनता है।

सड़क

महफ़िल

आदाब।

एक आदरपूर्ण नमस्ते।

लोग इस पंक्ति को छोटा रखते हैं। उस पल के लिए यही काफी है।

काउंटर

सड़क

नमस्ते।

नमस्ते।

यह पंक्ति पूरा ऑर्डर है। आपको लंबा वाक्य नहीं चाहिए।

दिन भर की भाषा

हिन्दी और उर्दू दोनों यहाँ के रोज़मर्रा का हिस्सा हैं। दोनों में से कोई अकेली नहीं रहती।

Chowk, Hazratganj, the Residency के आसपास, यही दिन की आम आवाज़ है।

लखनऊ में पहले दिन के लिए चार बातें काफी हैं: 「चौक चलिए।」, 「एक कबाब।」, 「आदाब।」 और 「नमस्ते।」。 हर एक अपने आप में एक पूरा पल है।

अगर आप यहाँ नए हैं

  • स्टॉप, कीमतें और दुकान के बोर्ड देवनागरी और उर्दू लिपि में लिखे होते हैं।
  • दुकान में विनम्र संबोधन आप है। जानने वालों के साथ तुम अधिक निकट हो।
  • अगर कोई बोली हुई पंक्ति निकल जाए, स्क्रीन या बोर्ड पढ़ लीजिए। लखनऊ में स्टॉप और कीमत लिखे होते हैं।

एक स्थानीय शब्द: आदाब। अर्थ है एक आदरपूर्ण नमस्ते।

कुछ जगहें जो आप देख सकते हैं

  • बड़ा इमामबाड़ा — 1780 के दशक में अकाल राहत के रूप में बना विशाल हाल। ऊपरी मंज़िल पर भूलभुलैया है।
  • रूमी दरवाज़ा — इमामबाड़े के पास उस्मानी रूप का ऊँचा समारोही द्वार।
  • हज़रतगंज — औपनिवेशिक खरीदारी की सड़क, जो अब भी शाम की सैर है।

खाना

अवधी पकवान स्थानीय थाली हैं: दम बिरयानी और नरम गलौटी कबाब।

आना-जाना

ई-रिक्शा चौक को हज़रतगंज से जोड़ते हैं। आप बस से भी शहर पार कर सकते हैं।

रोजमर्रा की ज़िंदगी

बिना जल्दबाज़ी की विनम्र बोली स्थानीय आदत है। कविता की शामें हिन्दी बातचीत के साथ उर्दू भी रखती हैं।

कुछ रोज़मर्रा के वाक्य

हिन्दी

वाक्यपढ़नाअर्थ
नमस्तेNamasteनमस्ते
धन्यवादDhanyavaadधन्यवाद
सुप्रभातSuprabhaatसुप्रभात
मेरा नाम… हैMera naam… haiमेरा नाम… है

उर्दू

वाक्यपढ़नाअर्थ
سلامSalaamनमस्ते
شکریہShukriyaधन्यवाद
صبح بخیرSubah bakhairसुप्रभात
میرا نام… ہےMera naam… haiमेरा नाम… है

स्रोत

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